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गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

आकुल वसंत

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प्रिय आत्मन : सादर जयहिंद 
वसंत आगमन की सुरभित शुभकामनायें मेरी इस कविता के माध्यम से स्वीकार कर अनुग्रहीत करें ::




// आकुल वसंत //


पतझड़ के पतन पर, 
अवसाद के अवसान पर,
पीत-पुष्पित सरसों पर, 
नवांकुरित पत्र-वृन्द पर, 
भोर की ओस-मुक्ता पर, 
आकुल वसंत, व्याकुल वसंत |


प्रथम दृष्टिपात पर,
नयन निमन्त्रण घात पर,
केश-पाश के सुमन पर,
बाँकी कजरारी चितवन पर,
सरस रक्तिम अधरों पर,
आकुल वसंत, व्याकुल वसंत |

प्रशस्त ललाट के बिंदु पर,
अप्रतिम सौंदर्य-सिन्धु पर,
भैरवी में खनकती कलाई पर,
कपोलों पर झूलती लट पर,
सुध खो सरकते पट पर,
आकुल वसंत, व्याकुल वसंत |

कोकिला की कूक पर,
शीतल सरिता मूक पर,
सुखद स्वर्णिम रश्मि पर,
सतत सुधा सिंचन पर,
अल्हड़ से प्रेम-आलिंगन पर,
आकुल वसंत, व्याकुल वसंत |



धन्यवाद
डॉ.अमित कुमार नेमा
04/02/2014

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति को आज की विशेष बुलेटिन - भारत कोकिला से हिन्दी ब्लॉग कोकिला तक में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. सादर धन्यवाद !! बंधुवर , अवश्य ही आऊंगा हर्ष जी , मेरा अहोभाग्य है |

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  2. उत्तर
    1. निहार रंजन जी , बहुत बहुत धन्यवाद

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  3. वसंत का रंग हर किसी पर चढ़ा है
    बहुत ही सुन्दर रचना !

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    उत्तर
    1. शुक्रिया, शिवनाथ जी , आपने इसे सराहा , यही इस कविता की सार्थकता है |

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  4. उत्तर
    1. शुक्रिया हर्ष जी, आपके द्वारा इंगित ब्लॉग पर अवश्य आऊंगा |

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