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सोमवार, 1 सितंबर 2014

'इश्क़ तुम्हें हो जाएगा' 'ब्लॉगसेतु' पर : एक किताब - एक पोर्टल

जी हाँ , आज के शीर्षक से आप को कुछ-कुछ आभास तो हो ही गया होगा कि आज चर्चा का विषय है एक किताब और एक अंतर्जाल स्थल , अपनी बात शुरू करते हैं इश्क़ की किताब से फिर आप और हम चलेंगे ब्लॉग के सेतु पर :

 'इश्क़ तुम्हें हो जाएगा' 

हाथ में आई कोई किताब तब तक दिल में नहीं उतर पाती जब तक कि उससे मोहब्बत न हो जाये, लफ्ज़-दर-लफ्ज़ और नज़्म-दर-नज़्म यह सिलसिला पुख्ता होता जाता है, लेकिन जब इस सिलसिले का नाम ही 'इश्क़ तुम्हें हो जाएगा' हो तो यह पहली ही नज़र में, पहली ही छुअन में आँखों से होकर रगों में समाने लगती है ।  इसमें जरुर कहीं ना कहीं कवियित्री की रसायनशास्त्र की तालीम का हाथ है, जो उन्होंने ऐंसे हैरतअंगेज शब्द-समीकरण सिद्ध कर डाले हैं : 

" तुम पर लिखी नज्मों, 
स्याही से रंगे हुए हैं हाथ मेरे, 
तुझसे इश्क़ का सीधा इल्जाम है मुझ पर, 
एक सजा खत्म हो तो नयी कोई नज्म लिखूं ..............."




कलम भी स्याह है, और उसका अंतरद्रव भी स्याह ही है लेकिन जब यह कागज़ के जिस्म पर उतारा गया है तो हम जैसों को सुर्खरूह कर गया है।  और गवाह हैं हम भी इस मौके के जब कि Anulataजी  की कृति ने काव्य-विलयन ( Solution ) बना डाला है , जिसमें इश्क़, विलेय ( solute ) है और इसकी रवानी, विलायक ( Solvent ) आपने हमें यह संतृप्त (saturated) शर्बत चखाया और भरपेट पीने का मौका दिया इसके लिए तहेदिल से शुक्रगुजार हैं | आपकी चीज आपको ही पेश करता हूँ : 

"ठहरे वक्त में चलती रही कलम
इश्क़ और दर्द की रोशनाई से
स्याह हुए पन्ने आपकी नजर
और एक छोटा सा वादा
कि पढ़ना मुझे तन्हाइयों में
इश्क़ तुम्हें हो जायेगा............................

आइये अब कुछ देर पुल पर भी खड़े हो लेते हैं इस पुल का नाम है : 


वो सभी मित्र जो ब्लॉगलेखक हैं,  या ब्लॉगपाठक हैं उनके लिए मित्र Kewal Ram जी और उनकी टीम ने एक नवप्रयास प्रारम्भ किया है, विशेषत: राष्ट्रभाषा हिन्दी के चिट्ठाकारों के लिए  जिसका नाम है Blogsetu, यह है तो एक ब्लॉग एग्रीगेटर लेकिन कुछ हट कर , इसके लिये वह बधाई के पात्र हैं इसकी कुछ विशेषतायें जो मुझे अच्छी लगीं : 




1. इससे जुड़ना पूर्णत: नि:शुल्क और आसान है , पंजीकरण की प्रक्रिया में मुश्किल से 5 मिनिट का समय लगता है। 

2. अपने और साथी ब्लॉगलेखकों के ब्लॉग तक पहुंचना बहुत आसान है , नवीन और पुरानी पोस्ट एक ही जगह पर समयवार ( Chronologically ) उपलब्ध हैं जिनसे आप सुगमता से उनको पढ़ सकते हैं।  

3. प्रतिदिन जुड़ने वाले ब्लॉग की प्रविष्टि रोज अपडेट होती है,  ब्लॉगसेतु से जब कोई ब्लॉग जुड़ जाता है तो उस ब्लॉग पर जब भी कोई पोस्ट ब्लॉगर द्वारा प्रकाशित की जाती है तो वह एक मिनट से भी कम समय में स्वतः ही ब्लॉगसेतु पर अपडेट हो जाती हैंऔर प्रत्येक रविवार को इससे जुड़े हुए ब्लॉग की रैंक अपडेट होती है।  

4. एक बार जुड़ जाने पर आप अपने ब्लॉग के सभी आंकड़े आप यहीं पा सकते हैं जो निश्चय ही ब्लॉगिंग को एक सुखद अनुभव में बदल देते हैं।  

और 5 ( पर अंतिम नहीं ) . साथी ब्लॉगलेखकों का जन्मदिवस प्रदर्शित होता है जो इसे आत्मीयता का एक मंच बना देता है ........

आप भी ब्लॉगसेतु से जरुर जुड़ें , कोई समस्या होने पर नि:संकोच पार केवलराम जी से सम्पर्क कर सकते हैं । 

चलते-चलते कुछ पंक्तियाँ अनुलता जी की किताब से 
जब ज़िंदगी में एहसासे - सुकूँ था
तब लिखी गयी कोई कविता
जब कभी कभी दिल परेशाँ हुआ
तब भी लिख डाली कोई एक सीली - सी नज्म 

तब तक के लिए आज्ञा दीजिये , अमित के प्रणाम स्वीकार करें..... 



10 टिप्‍पणियां:

  1. अपनी किताब को यहाँ पाकर बेहद खुश हूँ......
    आभारी हूँ आपकी और ब्लॉग सेतु की....

    दिल से शुक्रिया !
    अनुलता

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    1. अच्छी सी कोई किताब और आपके जैसे किसी अच्छे मित्र का जादू सर चढ़ के बोलता ही है ........सो वही हुआ !! आपका स्वागत है , अभिनंदन है !!!

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  2. मेरे जैसे बन जाओगे जब "इश्क तुम्हें हो जायेगा"
    दीवारों से टकराओगे जब "इश्क़ तुम्हें हो जायेगा"
    तन्हाई के झूले झूलोगे हर बात पुरानी भूलोगे
    तुम भी घर देर से आओगे जब "इश्क़ तुम्हें हो जायेगा"

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    1. हर बात गवारा कर लोगे मन्नत भी उतारा कर लोगे
      ताबीज़ें भी बँधवाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा

      जब सूरज भी खो जायेगा और चाँद कहीं सो जायेगा
      तुम भी घर देर से आओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा

      बेचैनी बढ जायेगी और याद किसी की आयेगी
      तुम मेरी ग़ज़लें गाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा.......शुक्रिया ! विजय जी

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  3. अनु जी की किताब पर आपकी समीक्षा पढना अच्छा लगा बहुत बढ़िया लिखा है

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    1. सादर धन्यवाद वंदना जी, अनु जी का संग्रह है ही उत्कृष्ट , मैंने तो बस कुछ टूटे फूटे शब्दों में लिख डाला है जो मन में आया आप सभी को यह अच्छा लगा यही मेरे लिए प्राप्ति है |

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  4. "वो जब लिखती है तो बस कागज़ पर अपना दिल निकाल कर रख देती है " और उस दिल से निकली हर रचना हम पाठकों के दिल के गहराई तक छू जाती है, सच कहा संजय, अनु को हमारे ब्लॉग जगत में कौन नहीं जानता हम सबकी चहेती और एक बेहद संवेदनशील लेखिका है वो, "इश्क़ तुम्हे हो जायेगा" इस काव्यसंग्रह के लिए बहुत बहुत बधाई अनु को ! अच्छी समीक्षा की है आपने !

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  5. इतनी सुन्दर पुस्तक है की उसकी चर्चा करना लाजमी है..
    एक बार फिर इस सुन्दर पुस्तक के लिए अनु जी को बधाई...
    और आपको भी बहुत-बहुत बधाई सर इस लेखन के लिए....
    आप दोनों को शुभकामनाएँ.....
    :-)

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  6. नमस्कार विजय जी सुन्दर समीक्षा लिखी है आपने
    मैंने भी एक पोस्ट लिखी है अनु जी के लिए

    कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-
    वो जब लिखती हैं कागज पर अपना दिल निकाल कर रख देती है -- अनुलता राज नायर :)
    http://sanjaybhaskar.blogspot.in/2014/08/blog-post_25.html#links

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    1. संजय जी !! नमस्कार , सादर धन्यवाद , अच्छी चीज होती ही ऐंसी है कि वाह-वाह खुदबखुद मुंह से निकल आती है | आपको मेरी समीक्षा में अच्छे होने का बोध हुआ, इससे मेरे ना कुछ से शब्द, सार्थक हो गये , आपके ब्लॉग पर हो के आया हूँ मनोहर है आपका रचना संसार !!

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